घाना खमरिया की रहने वाली पूनम फर्नांडो ने कभी ठेले पर खाना बेचकर परिवार की आजीविका चलाने का सफर शुरू किया था। परिस्थितियाँ बदलीं, लॉकडाउन आया और कारोबार प्रभावित हुआ, लेकिन पूनम और उनके पति प्रभाकर ने हिम्मत नहीं हारी। छोटे-छोटे ऑर्डरों से शुरुआत कर उन्होंने अपने व्यवसाय को संभाला और अब अपनी बेटी के नाम से ‘दिव्या फास्ट फूड सेंटर’ चला रही हैं।

पूनम बताती हैं कि पहले वे ठेले पर फास्ट फूड बेचती थीं। बाद में किराए की दुकान ली, परंतु लॉकडाउन में आर्थिक स्थिति बिगड़ गई। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। किसी फैक्ट्री में 10-12 प्लेट खाना पहुँचाना हो या जन्मदिन, प्रेयर मीटिंग अथवा गृह-निर्माण के दौरान पूरी-सब्जी का ऑर्डर, वे वेज और नॉन-वेज के हर छोटे ऑर्डर लेने लगीं।

व्यवसाय बढ़ाने के लिए पूनम ने सबसे पहले प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना से 10 हजार रुपये का ऋण लिया और समय पर चुका दिया। इसके बाद व्यवसाय को बड़े स्तर पर ले जाने के लिए उद्यानिकी विभाग और बैंक अधिकारियों के सहयोग से उन्होंने फ़ूड लाइसेंस बनवाया और पीएमएफएमई योजना के तहत 2.70 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत कराया।

इस राशि से उन्होंने फ्रिज, राइस ग्राइंडर, टेबल-कुर्सियां और अन्य आवश्यक उपकरण खरीदे। आज ' दिव्या फास्ट फूड सेंटर ' में पूनम इडली, डोसा, सांभर, वड़ा और कटलेट के साथ ग्राहकों की माँग पर नॉन-वेज व्यंजन भी तैयार करती हैं। दुकान में बिजली न होने पर उन्होंने स्वयं का मीटर भी लगवाया।

पूनम के अनुसार, रेस्टोरेंट से सामान्य दिनों में रोजाना 1000 से 1500 रुपये की आमदनी होती है, जबकि मासिक आय 40 से 50 हजार रुपये तक पहुँच जाती है। वे कहती हैं कि यदि सरकारी योजना, बैंक और उद्यानिकी विभाग का सही समय पर मार्गदर्शन न मिलता, तो वे शायद छोटे व्यवसाय तक ही सीमित रह जातीं। ठेले से शुरू हुआ पूनम का यह संघर्षपूर्ण सफर आज एक सफल और व्यवस्थित रेस्टोरेंट के रूप में मिसाल बन चुका है।